देश में अब कोई भी कंपनी ‘ORS’ (Oral Rehydration Solution) नाम से मीठे ड्रिंक बेच नहीं सकेगी। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने आदेश जारी कर साफ कर दिया है कि केवल वही उत्पाद ‘ORS’ कहलाएगा जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानक फॉर्मूले पर खरा उतरेगा।
यह फैसला किसी आम आदेश की तरह नहीं, बल्कि एक आठ साल लंबी लड़ाई की जीत है — वो लड़ाई जो हैदराबाद की बाल रोग विशेषज्ञ (Paediatrician) डॉ. शिवरांजनी संतोष ने अकेले शुरू की थी।
क्या है ORS और क्यों है ज़रूरी?
ORS (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) एक ऐसा घोल है जो डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) से बचाने में मदद करता है, खासकर दस्त या उल्टी जैसी बीमारियों में।
WHO के मुताबिक, इसका सही उपयोग दस्त से होने वाली मौतों में 93% तक कमी ला सकता है।
WHO का तय मानक फॉर्मूला प्रति लीटर इस प्रकार है:
• 2.6 ग्राम सोडियम क्लोराइड
• 1.5 ग्राम पोटैशियम क्लोराइड
• 2.9 ग्राम सोडियम साइट्रेट
• 13.5 ग्राम डेक्सट्रोज (शक्कर)
कुल घुलनशीलता स्तर (Osmolarity): 245 mOsm/L

बाजार में मिल रहे थे ‘शुगर ड्रिंक्स’ के नाम पर फर्जी ORS
डॉ. शिवरांजनी के अनुसार, बाजार में कई कंपनियां मेडिकल ग्रेड ORS के नाम पर मीठे ड्रिंक बेच रही थीं, जिनमें शक्कर की मात्रा 120 ग्राम प्रति लीटर तक थी, जबकि नमक और पोटैशियम बेहद कम थे।
ऐसे उत्पाद न केवल बेअसर थे, बल्कि मरीजों के लिए खतरनाक भी साबित हो सकते थे।
कैसे शुरू हुई डॉ. शिवरांजनी की जंग?
2017 में, डॉ. शिवरांजनी संतोष ने पहली बार इस गड़बड़ी को नोटिस किया और जनजागरूकता अभियान शुरू किया।
बाद में उन्होंने 2021 में सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO), FSSAI, और स्वास्थ्य मंत्रालय को शिकायत भेजी।
अप्रैल 2022 में FSSAI ने ORS शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाई, लेकिन तीन महीने बाद इसे वापस ले लिया और कंपनियों को ‘डिस्क्लेमर’ के साथ ORS नाम का इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी — जो जनता को गुमराह करने वाला कदम था।
अदालत से लेकर सोशल मीडिया तक चली मुहिम
जब प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाया, तो डॉ. संतोष ने पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) दायर की।
उन्होंने सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लगातार उठाया, जिससे उन्हें एंडोक्राइन सोसाइटी ऑफ इंडिया और वूमन पीडियाट्रिशियंस फोरम जैसे संगठनों का साथ मिला।
आखिरकार मिली जीत – FSSAI का ऐतिहासिक फैसला
15 अक्टूबर 2025 को FSSAI ने ऐतिहासिक आदेश जारी किया — अब कोई भी पेय उत्पाद ‘ORS’ का नाम नहीं रख सकेगा, जब तक वह WHO के निर्धारित मानकों पर खरा न उतरे।
यह फैसला न केवल मरीजों के हित में है, बल्कि भारत में स्वास्थ्य उत्पादों की पारदर्शिता और गुणवत्ता नियंत्रण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

“यह जीत सिर्फ मेरी नहीं, हर मरीज की है” – डॉ. शिवरांजनी
अपने बयान में डॉ. शिवरांजनी ने कहा,
“यह जीत सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की है जो सही इलाज का हकदार है। अब कोई भी कंपनी जनता के भरोसे से खिलवाड़ नहीं कर पाएगी।”
निष्कर्ष
इस आदेश के बाद अब बाजार में बिकने वाले हर ORS पैकेट की सही फॉर्मूलेशन और गुणवत्ता जांच सुनिश्चित करनी होगी।
यह पहल भारत में मेडिकल प्रोडक्ट्स की सच्चाई और पारदर्शिता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
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